शनिवार, 31 जुलाई 2010

अब मैं भी भड़ास पर आने की तैयारी कर रहा हूँ। बहुत कुछ ऐसा है जो लिखना है और अपने सभी साथियों को पढ़ाना है और खुद भी पढना है। मध्य प्रदेश की राजनितिक हलचल और प्रदेश की कुछ गतिविधियाँ अभी तक बिना लिखे हैं। जिन पर लिखूंगा और भडासी होने का धर्म निभाऊंगा।

अभी तो बस नमस्कार

काशीनाथ

सोमवार, 5 जुलाई 2010

भारत बंद

आज भारत की जनता ने एक बार फिर बता दिया कि वो आज भी देश कि मालिक है। नेताओं और ऑफिसर को ये भ्रम नहीं होना चाहिए कि वो मालिक हैं। कश्मीर से कन्या कुमारी तक और अटक से लेकर कटक बल्कि उत्तर पूर्व के बिलकुल कोने तक पूरा भारत बंद रहा। मीडिया को भी समझ लेना चाहिए कि अब वो नहीं चलेगा जो मीडिया अपनी हेकड़ी में चलाना चाहता है। धोनी कि शादी दिखा कर मीडिया ये बताना चाहता था कि वो जो कर रहा है वो ही सही है लेकिन जनता ने बता दिया कि जो तुम कर रहे हो वो ही सही नहीं है। दुनिया कि दूसरी सबसे बड़ी आबादी और दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र कि इतनी बड़ी हड़ताल या आन्दोलन को दबा पाना मीडिया के धन्ना सेठों के लिए भी संभव नहीं था। और देश कि जनता ने बंद को सफल कर दिया। हाँ ये भी हुआ कि जब जनता दल (यु) के नेता शरद यादव मीडिया कि इस बात के लिए कोस रहे थे कि आप लोग भी अजीब हो धोनी और राखी सावंत कि ख़बरें दिखाते रहते हो, उसी समय पर चेनल्स ने ये दिखाना शुरू कर दिया कि बिहार में बंद के चलते लडकियां नांच रही हैं। ये खबर तो है लेकिन इस खबर को दिखा कर मीडिया क्या बताना चाहता है कि अगर तुम आन्दोलन में ये करोगे तो हम तो मीडिया हैं और बेलगाम भी कि जनता पर ३६५ दिन वाही थोपेंगे जो हमारी मर्जी होगी। यानी तीन सी ( क्राइम क्रिकेट और सिनेमा ) कि खबर तो तुमको देखना ही होगी। एक बात पर बड़ा ताज्जुब हुआ कि विनोद दुआ और विनोद शर्मा जैसे पत्रकार भी बंद का विरोध करते नजर आये। बड़ी बड़ी बातें करते हुए ये दोनों पत्रकार देश के सारे विपक्षी नेताओं को कोसते नजर आ रहे थे। उनका कहना था ये बंद नहीं होना था। क्योंकि आम आदमी तैयार नहीं था। बंद उस पर थोपा गया। अब इन दोनों को कौन समझाए कि भैया नेताओं को कोसना बड़ा आसन है जब जो मुंह में आये कह दो। इनसे पूछो कि जनता कि कौन सुन रहा है जरा बता दो इनकी भी बोलती भी बंद हो जाएगी। खैर बड़े पत्रकार हैं तो कौन बोलेगा, लेकिन मैं भी छोटा ही सही हूँ तो पत्रकार ही तो बोल सकता हूँ । और बोल रहा हूँ कि दोनों विनोद इतना धयान रहे कि सिर्फ जो भी कहो ये धयान रहे कि आप भी जनता से बड़े नहीं हो और देश में होने वाले किसी भी आन्दोलन का इतनी जल्दी और आसानी से विरोध करने का काम नहीं किया करो। वर्ना किसी दिन जनता तुमको भी सुनना बंद कर देगी और तुमारा भारत हमेश के लिए बंद हो जायेगा।

शुक्रवार, 18 जून 2010

आज बीजेपी ने गैस त्रासदी में कांग्रेस को घेरने के लिए भोपाल के पोलिटेक्निक चौराहे पर धरना दिया। डर था की कहीं धरना फ्लॉप ना हो इसलिए नए प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने पूरे प्रदेश के लोगों को इसमें शामिल कर लिया अब इनको कौन बतलाये की ये सब तो रूटीन है और नेता लोग भी यही कर रहे हैं। बीजेपी की असल में दिक्कत ये है की उसको लगता है की गैस का मामला जितनी तेजी से उभरेगा उतनी तेजी से शादी का काम बता कर झंझट बनता जा रहा है.

बुधवार, 16 जून 2010

गैस फिर उड़ रही है.

भोपाल की गैस त्रासदी पर अभी तो बहुत कुछ लिखा और कहा जा रहा है लेकिन मेरा मानना है की अभी तो धूल उड़ रही है। असली तस्वीर कुछ दिन में साफ़ होगी तब ही कुछ कहना सही होगा। २५ - २६ साल से बहुत लोग कुछ कुछ कह और कर रहे हैं। जिन लोगों ने उस समय चुप्पी मारी थी वो भी अब बोल रहे हैं। बीजेपी बहुत हल्ला कर रही है, उसके नेता कांग्रेस को घेर रहे हैं जैसे बड़ा मुद्दा हाथ लग गया हो। कांग्रेस अभी चुप है और एक तरह से बचाव की मुद्रा है। लेकिन गैस पीड़ित अभी भी वहीँ खड़ा है जहाँ २५ साल पहले था। एंडरसन फरार है तो है ही। वो आएगा या नहीं ये भी नहीं पता। मीडिया के लिए तो उत्सव का माहौल है। जो हमेशा होता है। बहुत सारे सवाल हैं जिनका उत्तर बहुत सारे लोगों को देना है। नेता पत्रकार एन जी ओ अफसर वकील सब लगे हैं और अपना अपना राग अलाप रहे हैं। इसलिए अभी धूल छटने का इन्तजार करना चाहिए.

सोमवार, 7 जून 2010

आज का दिन (7 जून २०१०) बड़ा ही निराश करने वाला रहा इस दिन भोपाल के मुख्या न्यायिक दंडाधिकारी एम् पी तिवारी ने सदी के सबसे बड़े औद्योगिक हादसे पर फैसला सुनाया. फैसला इस बात पर रहा की २ और ३ दिसम्बर १९८४ की दरमियानी रात को जो मौतें हुई थी उसके दोषी वारेन एंडरसन, केशव महिंद्रा, विजय गोयल, किशोर कामदार, के पी शेट्टी, जे पी मुकुंद एस पी चौधरी, एस आई कुरैशी, आर पी रायचौधरी के खिलाफ ये मुकदमा था इसमें इन सभी को धारा३३६,३३७,३३८,और ३०४(अ) का दोषी पाया गया और जब सजा सुनाई गई तो अचरज था। १५२७४ मौत के जिम्मेवारों को केवल २ साल की सजा सुना दी गई फैसला सुनते ही गैस पीड़ित आग बबूला हो गए और वो महिलाएं जो २५ साल से लगातार लड़ रही थीं उनका गुस्सा फूट पड़ा इस फैसले को इन्साफ नहीं मानने वालों की तादाद बड़ी थी, लेकिन फैसला था सो सुनाया जा चुका था ये वो लड़ाई है जो इतनी जल्दी ना अदालत का पीछा छोड़ेगी और ना सरकार का जो इसके भुगत भोगी हैं यदि उनकी सुनी जाये तो २ और ३ दिसम्बर की दरमियानी रात का वो मंजर भोपाल के इतिहास की वो तारिख है जब एक तरफ लाशों का ढेर था तो दूसरी तरफ वारेन को बचाती मध्य प्रदेश की सरकार श्मशान और कब्रिस्तान में जगह कम पड़ने लगी औरपोस्टमार्टम के जानकार कहे जाने वाले डॉ सत्पथी ने भी कमाल कर दिया था तीन दिन में ३ हजार पोस्टमार्टम करके वो डॉ डेथ के नाम से जाने जाने लगे थे। लेकिन फैसला इतना निराशाजनक की किसी को नहीं भाया आज भी लोग वारेन को नहीं भूल पाए हैं इस मामले में देश की सबसे बड़ी एजेंसी सी बी आई की भूमिका पर भी सवाल खड़े किये जा रहे हैं। तमाम बातों के बावजूद जो भी हुआ वो दुखी कर गया

गुरुवार, 3 जून 2010

दोस्तों दुनिया को जोड़ो और दुनिया से जुडो
अब मैं भी ब्लॉग पर आ गया हूँ बाज़ार में बैठे सारे लोग को नमस्कार