आज का दिन (7 जून २०१०) बड़ा ही निराश करने वाला रहा इस दिन भोपाल के मुख्या न्यायिक दंडाधिकारी एम् पी तिवारी ने सदी के सबसे बड़े औद्योगिक हादसे पर फैसला सुनाया. फैसला इस बात पर रहा की २ और ३ दिसम्बर १९८४ की दरमियानी रात को जो मौतें हुई थी उसके दोषी वारेन एंडरसन, केशव महिंद्रा, विजय गोयल, किशोर कामदार, के पी शेट्टी, जे पी मुकुंद एस पी चौधरी, एस आई कुरैशी, आर पी रायचौधरी के खिलाफ ये मुकदमा था इसमें इन सभी को धारा३३६,३३७,३३८,और ३०४(अ) का दोषी पाया गया और जब सजा सुनाई गई तो अचरज था। १५२७४ मौत के जिम्मेवारों को केवल २ साल की सजा सुना दी गई फैसला सुनते ही गैस पीड़ित आग बबूला हो गए और वो महिलाएं जो २५ साल से लगातार लड़ रही थीं उनका गुस्सा फूट पड़ा इस फैसले को इन्साफ नहीं मानने वालों की तादाद बड़ी थी, लेकिन फैसला था सो सुनाया जा चुका था ये वो लड़ाई है जो इतनी जल्दी ना अदालत का पीछा छोड़ेगी और ना सरकार का जो इसके भुगत भोगी हैं यदि उनकी सुनी जाये तो २ और ३ दिसम्बर की दरमियानी रात का वो मंजर भोपाल के इतिहास की वो तारिख है जब एक तरफ लाशों का ढेर था तो दूसरी तरफ वारेन को बचाती मध्य प्रदेश की सरकार श्मशान और कब्रिस्तान में जगह कम पड़ने लगी औरपोस्टमार्टम के जानकार कहे जाने वाले डॉ सत्पथी ने भी कमाल कर दिया था तीन दिन में ३ हजार पोस्टमार्टम करके वो डॉ डेथ के नाम से जाने जाने लगे थे। लेकिन फैसला इतना निराशाजनक की किसी को नहीं भाया आज भी लोग वारेन को नहीं भूल पाए हैं इस मामले में देश की सबसे बड़ी एजेंसी सी बी आई की भूमिका पर भी सवाल खड़े किये जा रहे हैं। तमाम बातों के बावजूद जो भी हुआ वो दुखी कर गया